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उज्जैन में कांग्रेस की गुटबाजी खुलकर सामने आई, जिला अध्यक्ष की नियुक्ति पर सड़क पर उतरे कार्यकर्ता; सड़क पर लेटकर रोका उमंग सिंघार का काफिला!
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
मध्य प्रदेश कांग्रेस में जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। हाल ही में नवनियुक्त कांग्रेस जिला अध्यक्ष महेश परमार के खिलाफ पार्टी के भीतर ही जबरदस्त विरोध शुरू हो गया है। मंगलवार शाम इस विरोध ने तब नया मोड़ ले लिया, जब कांग्रेस कमेटी के सचिव हेमंत सिंह चौहान के समर्थकों ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन किया और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के काफिले को रोक लिया।
सड़क पर लेटकर रोका काफिला
सूत्रों के मुताबिक, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार नरवर से होते हुए उज्जैन सहित अन्य जिलों के दौरे पर जा रहे थे। इस दौरान जानकारी मिलते ही हेमंत सिंह चौहान के समर्थक अचानक उनके काफिले के सामने आ गए। कार्यकर्ताओं ने नाराजगी जताते हुए सड़क पर लेटकर कार को रोक लिया और जमकर नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि जिला अध्यक्ष की नियुक्ति में जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई है। उनका स्पष्ट आरोप था कि महेश परमार की जगह हेमंत सिंह चौहान को जिला अध्यक्ष बनाया जाना चाहिए। कार्यकर्ताओं के इस उग्र प्रदर्शन के कारण काफिला कुछ समय तक वहीं थमा रहा।
सिंघार ने सुनी कार्यकर्ताओं की बात
हालात को संभालने के लिए उमंग सिंघार ने खुद हस्तक्षेप किया। उन्होंने प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं को शांत करने के लिए हेमंत सिंह चौहान को अपनी कार में बैठाया और उनकी बात विस्तार से सुनी। सिंघार ने भरोसा दिलाया कि वह इस मुद्दे को लेकर पार्टी संगठन में चर्चा करेंगे और कार्यकर्ताओं की नाराजगी का समाधान खोजने का प्रयास किया जाएगा।
घटना के बाद कांग्रेस कमेटी के सचिव हेमंत सिंह चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी के असली कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने नेता प्रतिपक्ष के सामने अपनी बात रख दी है। हमारे कार्यकर्ता आक्रोशित हैं। उम्मीद है कि संगठन हमारी भावनाओं को समझेगा। आज शाम तक इस विषय पर नई सूचना मिल सकती है।”
सोशल मीडिया पोस्ट हटाने के निर्देश
इधर, पूरे प्रदेश में जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर हो रहे विरोध और सोशल मीडिया पर सामने आई बयानबाजी को देखते हुए प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सख्ती दिखाई है। पार्टी के महामंत्री संजय कामले ने एक पत्र जारी कर कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ किए गए पोस्ट या बयान 24 घंटे के भीतर सोशल मीडिया से हटाए जाएं।
पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि अगर विवादित पोस्ट नहीं हटाई गईं तो संबंधित कार्यकर्ताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया कि किसी को भी अपनी आपत्ति या राय रखनी हो तो वह सीधे जिला अनुशासन समिति के सामने जाकर अपनी बात रख सकता है।
उज्जैन में हुआ यह घटनाक्रम कांग्रेस संगठन के भीतर बढ़ती गुटबाजी को एक बार फिर उजागर करता है। पार्टी के सामने चुनावी वर्ष में एकजुट होकर काम करने की चुनौती है, लेकिन जिला स्तर पर नेताओं के बीच चल रही खींचतान ने कार्यकर्ताओं में असमंजस पैदा कर दिया है। अब देखना होगा कि प्रदेश नेतृत्व इस विवाद को कैसे संभालता है और क्या महेश परमार की नियुक्ति बरकरार रहती है या इसमें बदलाव किया जाता है।